साहिबगंज: चैती चित्रगुप्त पूजा के बहाने अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का आयोजन

साहिबगंज: चैती चित्रगुप्त पूजा के बहाने अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का आयोजन

चैती। चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का आयोजन हुआ, लेकिन इस आयोजन में असली चर्चा का केंद्र पूर्व डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव का राजनीतिक भविष्य बना। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व गृह मंत्री सुबोधकांत सहाय समेत कई अन्य दिग्गज नेताओं ने समाज की एकजुटता पर जोर देते हुए मोहन श्रीवास्तव को विधानसभा में भेजने की खुली अपील की। इस मौके पर बड़ी संख्या में कायस्थ समाज के पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी देर रात तक बनी रही।

कायस्थ राजनीति में हाशिए पर क्यों?

महासभा में मौजूद नेताओं ने कहा कि कायस्थों का इतिहास हर क्षेत्र में अतुलनीय रहा है और देश को दिशा देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके द्वारा दी गईं असंख्य हस्तियों ने समाज को गर्व महसूस कराया है। लेकिन अब ऐसा नहीं है, खासकर राजनीति में। वर्तमान में केंद्र सरकार में एक भी कायस्थ मंत्री नहीं है, जबकि अतीत में ऐसा कभी नहीं हुआ। यह कायस्थ समाज की उपेक्षा का संकेत है और इसे बदलने का वक्त अब आ गया है। वक्ताओं ने समाज से राजनीति में सक्रिय होने की अपील की और मंच से यह साफ संदेश दिया गया कि अब फूल नहीं, बल्कि केवल कुल की बात होगी।

मोहन श्रीवास्तव के समर्थन में लहर उठाने की कोशिश

महासभा में शामिल नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब कायस्थ समाज को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए खुद लड़ना होगा। मुजफ्फरपुर से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मुकुल श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष विनोद श्रीवास्तव और मनीष वर्मा, इंदु सिन्हा समेत अन्य नेताओं ने मंच से समाज की एकजुटता का संदेश दिया। सभी ने कहा कि इस बार कायस्थ समाज को अपने वोटों की ताकत दिखानी होगी। नेताओं ने यह भी कहा कि अगर गया नगर विधानसभा में आठ बार से जीत रहे विधायक को हराकर मोहन श्रीवास्तव को विजयी बनवाया जाता है, तो वे मंत्री पद के भी दावेदार होंगे, जिससे कायस्थ समाज को उसका राजनीतिक हक मिलेगा।

अब खामोशी नहीं, हक की लड़ाई जरूरी

कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि कायस्थ समाज को अब खामोशी तोड़नी होगी। आजादी के बाद से लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाओं में कायस्थों की मजबूत मौजूदगी थी, लेकिन पिछले कुछ दशकों में यह खत्म हो गई। उन्होंने सियासी दलों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि इस कमी के लिए हमारी अपनी उदासीनता भी जिम्मेदार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कायस्थ समाज जागरूक नहीं हुआ तो आने वाले समय में राजनीतिक दल उन्हें पूरी तरह हाशिये पर डाल देंगे। उन्होंने कहा कि सत्ता, शासन और दलों को कायस्थों की ताकत का एहसास कराना होगा।

कायस्थों की अंतरराष्ट्रीय पहचान, लेकिन राजनीति में उपेक्षा क्यों?

सुबोधकांत सहाय ने कहा कि भगवान चित्रगुप्त के वंशज पूरी दुनिया में अपनी बुद्धिमता से शीर्ष पदों पर पहुंचे हैं। सरकार चाहे किसी की हो, लेकिन उसे चलाने वाला कायस्थ ही है। फिर भी भारत में राजनीतिक दल कायस्थों को दरकिनार कर रहे हैं। उन्होंने यह साफ कहा कि अब समय आ गया है कि कायस्थ समाज अपनी शक्ति को पहचाने और एकजुट होकर अपने समाज के नेताओं को जिताने के लिए आगे आए।इस महासभा के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आगामी चुनाव में कायस्थ समाज की एकता की परीक्षा होगी। कई नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि अब हमें अपनी जातीय अस्मिता के लिए वोट करना होगा।कार्यक्रम की शुरुआत भगवान चित्रगुप्त की पूजा-अर्चना से हुई, जिसके बाद समाज की राजनीतिक रणनीति पर खुलकर चर्चा हुई। कार्यक्रम लगभग तीन घंटे चला, और अंत में कायस्थ समाज के नेताओं और समर्थकों ने एक सुर में कहा— अबकी बार, केवल कुल की सरकार!

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BIHAR - JHARKHAND

 मैं पिछले 7 वर्षों से बिहार और झारखंड में पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूँ। इस दौरान, मैंने पत्रकारिता के हर पहलू को गहराई से समझा है और इस क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाई है। बिहार और झारखंड की सामाजिक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक घटनाओं पर गहरी नजर रखते हुए, मैंने इन दोनों राज्यों के विभिन्न मुद्दों को उजागर करने और लोगों तक सही और प्रामाणिक जानकारी पहुँचाने का प्रयास किया है।पत्रकारिता के इस सफर में, मैंने कई चुनौतियों का सामना किया है, लेकिन हर बार मैंने उन्हें एक अवसर के रूप में लिया और अपने कार्य को न केवल एक जिम्मेदारी बल्कि एक सेवा के रूप में निभाया है। मेरा लक्ष्य हमेशा से ही यही रहा है कि जनता को सत्य और निष्पक्ष खबरें प्रदान की जाएं, ताकि वे जागरूक और सूचित रहें। मैंने इस दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया है, और अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश की है। 

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